हरिशंकर राढ़ी की ग़ज़ल
हरिशंकर राढ़ी की ग़ज़ल
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हरिशंकर राढ़ी की ग़ज़ल
ग़ज़ल
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हरिशंकर राढ़ी
हरसू ही उत्पात चलेगा क्या कर लोगे बाऊजी ?
घात और प्रतिघात चलेगा क्या कर लोगे बाऊजी?
बाहर संसद से आ करके तुमको खूब सिखाएँगे
अंदर लातमलात चलेगा क्या कर लोगे बाऊजी ?
जब तक राशन के बदले तुम वोट थमाते जाओगे
तब तक ये खैरात चलेगा क्या कर लोगे बाऊजी?
तख्ते – ताऊस पर बैठी चालाकी ठट्ठे मारेगी
घुटनों पर ज़ज़्बात चलेगा क्या कर लोगे बाऊजी?
मंदिर-मस्जिद, गुरूद्वारे तो शाम ढले सो जाएँगे
ठेका सारी रात चलेगा
क्या कर लोगे बाऊजी?
तुम पी-एच.डी. कर लो चाहे कितने नंबर ले आओ
इंटरव्यू में नात चलेगा क्या कर लोगे बाऊजी?
सत्ता में अज्ञात और विख्यात नहीं चल पाता है
इसमें बस कुख्यात चलेगा क्या कर लोगे बाऊजी?
(30 मई, 2026)

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